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यह स्थान उनके लिए है जो अपने भीतर कुछ खोज रहे हैं — शांति, उत्तर, या केवल एक दिशा। ज्योत से ज्योत जलाकर, साथ चलते हुए खुद की खोज करना ही उद्देश्य है।
परंपरा
ज्योत से ज्योत जलाओ
यह परंपरा सूफ़ी और सिद्ध धाराओं का संगम है — ऐसे संतों की धारा, जो किसी एक पंथ के नहीं, सबके हैं। भगवान नित्यानंद से बाबा मुक्तानंद तक, और उनसे आगे — यह ज्ञान गुरु से शिष्य तक, दीप से दीप की भाँति, अखंड चला आया है।
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